बुधवार, 24 जून 2015

रात बिरत रा आखर- ५ (धूप और छाँव)

ज़िंदगी धूप तुम घना साया हो......
न जाने क्यों आजकल मैं यह गीत कईं बार गुनगुनाता रहता हूं। ज़िंदगी कभी-कभी ऐसे गहरे दु:ख प्रदान करती है कि लगता है कभी इससे उबर ही नहीं पायेंगे। पर कुछ लोग होते है जो जिनसे मिलने भर से लगता है कि सिक्का पलट जाता है।
प्रेम का जाना एक ऐसी दुर्घटना थी जिसने मुझे अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। लेकिन कुछ ऐसी भी घटनाएँ हुई जिनसे घावों पर मलहम लगा।
लोग रेगिस्तान से डरते है लेकिन मैंने रेत से प्यार किया है। इस रेतीले मुल्क से निकलते ही मेरा दम घुटता है। दिन को यहाँ जितनी गर्माहट होती है उसके उलट शामें हसीन होती जाती है। मुझे यहाँ की शामों से बहुत लगाव हैं, दिन ढलते ही मैं निकल जाता हूं किसी पहाड़ी की और तारे चमकने तक निहारता रहता हूं आक के पत्तों को, बेर की डालों के बीच से निकलते चाँद को और घर की ओर लौटते पँछीयों को। यहाँ कि शामें कितनी ज़ादूई होती हैं ।
मैं भी ना रेगिस्तानी कहाँ खो गया।
इन दिनों मेरे उड़ते रंग को फिर से भरने वाली बातें हुई। मेरी लिए अच्छी बात ये है कि मेरा जिनसे लगाव होता है वो दिल के बहुत अच्छे लोग होते है। .......ऐसे लोगों से पता नहीं क्यों मुझे अज़ीब सा लगाव है। अच्छा लगता है इनसे जुड़े रहना।
कल आईआईएमसी के लिखित एक्ज़ाम का परिणाम आ गया। और इंटरव्यु के लिये क्वालिफाई करना मेरे लिए सुकूनदायक पल था। बीएड और अन्य सभी तैयारियों को तिलांजलि दे चुका हूं सिर्फ और सिर्फ आई आई एम सी का भूत सवार है। और पहले ही मौके में इतनी सफलता संतुष्टि लायक है।
आज एक और अच्छी बात ये हुई कि गुरिक्क ब्रदर से मुलाकात हो गई। कईं दिनों से उनसे मुलाकात को लेकर उत्सुकता थी, मिलकर भी बहुत अच्छा लगा। ही इज़ वेरी नाइस पर्सन। इतनी ही अंग्रेजी आती है पूरी लगा देता हूं तारीफ़ मैं।
एक बात मैं आपसे बांटना भूल गया पिछले दिनों जब मैं एंट्रेस एक्ज़ाम देने दिल्ली गया था वहाँ मेरी मुलाकात शुशील जे, मीनाक्षी झा और उनकी बुलेट हरी-भरी से हुई (आपको ये भी बता दूं की हरी-भरी के ब्वॉयफ्रेंड यानि उनकी नई बुलेट का नाम केसरिया बालम है) थी, बहुत अच्छे लोग है। मेरी यहीं चाह है कि हर कदम पर ऐसे ही लोग मिले।
पत्ते, मधुर हवा, तारे, मेढक, और झपकियाँ......
पानड़ां गीत सुनायो उजास करयो तारां,
मधरो बाज्यो बायरियो अन ऊंघ आई जोरां।

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