मंगलवार, 23 जून 2015

एक सितारा खो गया चमकने से पहले ही

रोज की तरह ही सामान्य दिन, सुबह के आठ बजे थे सोशल मीडिया पर लगाने के लिए लेपटॉप पर फोटो देख रहा था कि अचानक भागम-भाग शुरू हो गई। भाई ने कहा कि प्रेम का एक्सीडेंट हो गया मैं एकदम सुन्न रह गया। मैं सोचने लगा कि अभी खबर आ जाएगी कि उसका इलाज चल रहा है पर सबकुछ खत्म हो चुका था। प्रेम के डॉक्टर बनने से पहले डॉक्टरों ने हमें बुरी खबर दे दी। हर कोई चुप्प था, बोले भी तो क्या बोले। रामगढ के पास हूए एक एक्सीडेंट ने प्रेम को हमसे छीन लिया। उसने इस वर्ष ही सीकर से बारहवीं पास की थी। उसी स्कुल से कुछ अध्यापक आये थे उनके साथ वह स्कुल के प्रचार के लिए गया था।

'सड़क दुर्घटना में एक की मौत पाँच घायल' अगले दिन के अखबारों के लिए यह एक सामान्य दुर्घटना की खबर थी लेकिन लौद्रवा गाँव के लिए यह एक दु:खद व अपूरणीय क्षति थी।
प्रेम से पूरे गाँव को उम्मीदें थी। वह पढाई में बहुत होशियार था। कुछ दिन पहले ही उसका बारहवीं का परिणाम आया था और परिणाम उम्मीद के अनुरूप ना आने के कारण वह निराश था, पर उसे पी एम टी में निकलने की उम्मीद थी। पी एम टी की परीक्षा रद्द होने के बाद फिर से तैयारी करने के लिए कुछ दिन पहले ही उसने शहर में रहना शुरू किया था।
पिछले दो सालों से वह सीकर में रहकर पढ रहा था। छुट्टियों में हम सब को उसका बेसब्री से इंतजार करते थे उसके आने के बाद ही हमारी टीम पूरी होती थी। अभी हाल ही में एक शादी में बहुत खुश नज़र आ रहा था जब मैंने पूछा तो कहने लगा कि दो साल से स्कुल और पढाई में बंधा था अब मौका मिला है खुश तो होउंगा ही ना। हमें क्या पता था कि ये खुशियाँ कुछ दिन की ही है। 
वह बहुत जिद्दी और मेहनती था। मैं उससे चार साल बड़ा होने के बाद भी बाइक सीखने पर अटका था पर उसने गाड़ी चलाना भी सीख लिया था। सीखने की बहुत ललक थी उसमें। पढाई के साथ-साथ खेलने में भी आगे रहता था वह।
उसकी मम्मी जब भी मिलते थे तो मुझसे यहीं सवाल पूछते थे कि अब प्रेम फॉर्म भरना कब शुरू करेगा। अठारह वर्ष का होते ही वह हम सब को अकेला कर गया। सबकी आँखो का तारा और उम्मीद था वह।
वह जब भी गाँव आता तब माड़साब्ब से जरूर मिलने जाता था, हर काम करने से पहले वह उनसे सलाह लिया करता था, लेकिन इस बार बिना बताये वह बहुत दूर चला गया इतना दूर की जहां से कोई लौटकर नहीं आता।
प्रेम तुम्हारे जाने को कैसे स्वीकार कर पायेंगे हम। कैसे जी पायेंगे वो लोग जिनके जीने का सहारा थे तुम। गाँव का हर चेहरा उदास है। लगता है जैसे सबकुछ ठहर गया हो।


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