शुक्रवार, 12 जून 2015

रात बिरत रा आखर- ४ (सड़क, बाज़ार और गाड़ी)

आज सुबह की शुरूआत देर से हुई। क्योंकि कल रात भजन संध्या में गुजर गई। आज आँख थोड़ी ज्यादा ही देर से खुली तभी सूरज बा आँखे तरेर रहे थे और उनका गुस्सा देखकर तो उठना ही पड़ा।

तज़ुर्बा ये है कि शराब बहुत कड़वी होती है, ये हर किसी के बस की बात नहीं और मेरे तो हरगिज़ नहीं।

सड़क का किस्सा। आज तो पूरा दिन सड़क पर ही गुज़रा। गाँव-शहर-ऑफिस-शहर-ऑफिस-शहर-गाँव। बाइक चलाते समय हेलमेट जरूर पहने वरना आपके लिए बहुत नुकसानदेह साबित होगा। अगर ट्रैफिक वालों ने पकड़ लिया ना तो फिर साम-दाम-दंड-भेद सब धरे के धरे रह जायेंगे। आपको तारीख पर तारीख मिलेगी। रिचार्ज करवाना पड़ेगा, पानी की बॉटल लाकर देनी पड़ेगी वो भी ढक्कन खोल के :(। तो देखिए हेलमेट ना पहनना कितना खतरनाक है।

आजकल सड़कों पर स्पीड ब्रेकर बहुत ज्यादा हो गये है, दुसरे गियर से आगे बढने का मौका ही नहीं मिलता। संभल कर रहें ज़िंदगी का भी यहीं हाल है :)।

बाज़ार का किस्सा सुनिये। शाम का वक़्त, बाज़ार में भीड़, लोडिंग टैक्सी सामान लादे बीच बाज़ार गुजर रही है। ड्राईवर अपनी मस्ती में दाँये-बायें घुमाते हूए टैक्सी निकाल रहा है, उसके पीछे कुछ लोग अपनी मोटरसाइकिल टैक्सी से आगे निकालने के जद्दोजहद में लगे है। बहुत देर तक टैक्सी द्वारा जगह ना दिये जाने के कारण एक मोटरसाईकिल वाले बुज़ुर्ग बिफर गये। बाइक रोकी भागकर टैक्सी के पास पहूंचे, टैक्सी वाला समझ गया कि आज तो पिटा। रोकते ही भागा। आगे टैक्सी वाला बड़बड़ाते हुए और पीछे बाइक वाले बा गालियाँ देते हुए।
देखिए लोग कैसे हो गये कुछ को पीछे की दुनिया से कोई मतलब नहीं अपनी धुन में मदमस्त। और कुछ है कि आगे निकलने की जद्दोजहद में लड़ते भिड़ते।

गाड़ी का किस्सा। गाड़ी में कुछ लोग बातें कर रहे हैं। 
पेश है उनकी बातचीत का कुछ अंश।
मोदी ने म्यांमार में जाकर १०० आंतकियों को मार डाला। मुशरर्फ ने कहा कि पाकिस्तान परमाणु बम फेंकेगा सब लोग मर जायेंगे।
अब मोहब्बत नहीं रही, क़यामत का दिन आने वाला है, मौलवी साहब ने कहा है कि एक आवाज़ आयेगी उस दौरान कानों में रुई डालकर सब सज़दे में हो जाना। बला टल जायेगी।
अब लगता है इस्लाम का एक बार अंत हो जायेगा।
वो तो होना ही है देखो लोग किस तरह झूठी क़ुरान की कसम ले रहे है। सबसे पहले पाकिस्तान का खात्मा होगा।
लोगों में इंसानियत ही नहीं रही देखो ये अंग्रेज घूमने आते है, कैसे लोग हो। भाई-बहन का रिश्ता भी पाक नहीं रहा।

किस्सा खत्म।

हवा तेज़ हो गई है, धूल हवा से बातें कर रही है हवा पत्तों से गलबहियाँ कर रही है। मेढकों की आवाज़ हवा में घुल रही है। तारे फेड होने लगे है, शायद आँखो में नींद छा रही है।
तो अगर आप निहारिये तारे मैं चला सोने......

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