सोमवार, 3 अगस्त 2015

नया ठिकाना

नये ब्लॉग का पता... http://www.raitraag.blogspot.in

बुधवार, 24 जून 2015

रात बिरत रा आखर- ५ (धूप और छाँव)

ज़िंदगी धूप तुम घना साया हो......
न जाने क्यों आजकल मैं यह गीत कईं बार गुनगुनाता रहता हूं। ज़िंदगी कभी-कभी ऐसे गहरे दु:ख प्रदान करती है कि लगता है कभी इससे उबर ही नहीं पायेंगे। पर कुछ लोग होते है जो जिनसे मिलने भर से लगता है कि सिक्का पलट जाता है।
प्रेम का जाना एक ऐसी दुर्घटना थी जिसने मुझे अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। लेकिन कुछ ऐसी भी घटनाएँ हुई जिनसे घावों पर मलहम लगा।
लोग रेगिस्तान से डरते है लेकिन मैंने रेत से प्यार किया है। इस रेतीले मुल्क से निकलते ही मेरा दम घुटता है। दिन को यहाँ जितनी गर्माहट होती है उसके उलट शामें हसीन होती जाती है। मुझे यहाँ की शामों से बहुत लगाव हैं, दिन ढलते ही मैं निकल जाता हूं किसी पहाड़ी की और तारे चमकने तक निहारता रहता हूं आक के पत्तों को, बेर की डालों के बीच से निकलते चाँद को और घर की ओर लौटते पँछीयों को। यहाँ कि शामें कितनी ज़ादूई होती हैं ।
मैं भी ना रेगिस्तानी कहाँ खो गया।
इन दिनों मेरे उड़ते रंग को फिर से भरने वाली बातें हुई। मेरी लिए अच्छी बात ये है कि मेरा जिनसे लगाव होता है वो दिल के बहुत अच्छे लोग होते है। .......ऐसे लोगों से पता नहीं क्यों मुझे अज़ीब सा लगाव है। अच्छा लगता है इनसे जुड़े रहना।
कल आईआईएमसी के लिखित एक्ज़ाम का परिणाम आ गया। और इंटरव्यु के लिये क्वालिफाई करना मेरे लिए सुकूनदायक पल था। बीएड और अन्य सभी तैयारियों को तिलांजलि दे चुका हूं सिर्फ और सिर्फ आई आई एम सी का भूत सवार है। और पहले ही मौके में इतनी सफलता संतुष्टि लायक है।
आज एक और अच्छी बात ये हुई कि गुरिक्क ब्रदर से मुलाकात हो गई। कईं दिनों से उनसे मुलाकात को लेकर उत्सुकता थी, मिलकर भी बहुत अच्छा लगा। ही इज़ वेरी नाइस पर्सन। इतनी ही अंग्रेजी आती है पूरी लगा देता हूं तारीफ़ मैं।
एक बात मैं आपसे बांटना भूल गया पिछले दिनों जब मैं एंट्रेस एक्ज़ाम देने दिल्ली गया था वहाँ मेरी मुलाकात शुशील जे, मीनाक्षी झा और उनकी बुलेट हरी-भरी से हुई (आपको ये भी बता दूं की हरी-भरी के ब्वॉयफ्रेंड यानि उनकी नई बुलेट का नाम केसरिया बालम है) थी, बहुत अच्छे लोग है। मेरी यहीं चाह है कि हर कदम पर ऐसे ही लोग मिले।
पत्ते, मधुर हवा, तारे, मेढक, और झपकियाँ......
पानड़ां गीत सुनायो उजास करयो तारां,
मधरो बाज्यो बायरियो अन ऊंघ आई जोरां।

मंगलवार, 23 जून 2015

एक सितारा खो गया चमकने से पहले ही

रोज की तरह ही सामान्य दिन, सुबह के आठ बजे थे सोशल मीडिया पर लगाने के लिए लेपटॉप पर फोटो देख रहा था कि अचानक भागम-भाग शुरू हो गई। भाई ने कहा कि प्रेम का एक्सीडेंट हो गया मैं एकदम सुन्न रह गया। मैं सोचने लगा कि अभी खबर आ जाएगी कि उसका इलाज चल रहा है पर सबकुछ खत्म हो चुका था। प्रेम के डॉक्टर बनने से पहले डॉक्टरों ने हमें बुरी खबर दे दी। हर कोई चुप्प था, बोले भी तो क्या बोले। रामगढ के पास हूए एक एक्सीडेंट ने प्रेम को हमसे छीन लिया। उसने इस वर्ष ही सीकर से बारहवीं पास की थी। उसी स्कुल से कुछ अध्यापक आये थे उनके साथ वह स्कुल के प्रचार के लिए गया था।

'सड़क दुर्घटना में एक की मौत पाँच घायल' अगले दिन के अखबारों के लिए यह एक सामान्य दुर्घटना की खबर थी लेकिन लौद्रवा गाँव के लिए यह एक दु:खद व अपूरणीय क्षति थी।
प्रेम से पूरे गाँव को उम्मीदें थी। वह पढाई में बहुत होशियार था। कुछ दिन पहले ही उसका बारहवीं का परिणाम आया था और परिणाम उम्मीद के अनुरूप ना आने के कारण वह निराश था, पर उसे पी एम टी में निकलने की उम्मीद थी। पी एम टी की परीक्षा रद्द होने के बाद फिर से तैयारी करने के लिए कुछ दिन पहले ही उसने शहर में रहना शुरू किया था।
पिछले दो सालों से वह सीकर में रहकर पढ रहा था। छुट्टियों में हम सब को उसका बेसब्री से इंतजार करते थे उसके आने के बाद ही हमारी टीम पूरी होती थी। अभी हाल ही में एक शादी में बहुत खुश नज़र आ रहा था जब मैंने पूछा तो कहने लगा कि दो साल से स्कुल और पढाई में बंधा था अब मौका मिला है खुश तो होउंगा ही ना। हमें क्या पता था कि ये खुशियाँ कुछ दिन की ही है। 
वह बहुत जिद्दी और मेहनती था। मैं उससे चार साल बड़ा होने के बाद भी बाइक सीखने पर अटका था पर उसने गाड़ी चलाना भी सीख लिया था। सीखने की बहुत ललक थी उसमें। पढाई के साथ-साथ खेलने में भी आगे रहता था वह।
उसकी मम्मी जब भी मिलते थे तो मुझसे यहीं सवाल पूछते थे कि अब प्रेम फॉर्म भरना कब शुरू करेगा। अठारह वर्ष का होते ही वह हम सब को अकेला कर गया। सबकी आँखो का तारा और उम्मीद था वह।
वह जब भी गाँव आता तब माड़साब्ब से जरूर मिलने जाता था, हर काम करने से पहले वह उनसे सलाह लिया करता था, लेकिन इस बार बिना बताये वह बहुत दूर चला गया इतना दूर की जहां से कोई लौटकर नहीं आता।
प्रेम तुम्हारे जाने को कैसे स्वीकार कर पायेंगे हम। कैसे जी पायेंगे वो लोग जिनके जीने का सहारा थे तुम। गाँव का हर चेहरा उदास है। लगता है जैसे सबकुछ ठहर गया हो।


गुरुवार, 18 जून 2015

बीज का चाँद

प्रत्येक वार को एक त्योहार, वाले इस देश में जाने कितने शुभ दिन बनाए गये है जीवन के प्रत्येक पल को जीने के लिए, उल्लास प्रकट करने के लिए, पूजा पाठ करने के लिए और इस मनुष्य जाति के निर्माता को धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए।
आज दूज के चाँद पर चल रही मुबारकों के साथ आपको बता रहा हूं कि थार के रेगिस्तान का जनमानस बीज के चाँद में बहूत आस्था रखता है।
बीज के दिन पर यहाँ कईं देवी-देवताओं की पूजा होती है।
खासतौर पर पीरों की पूजा। चाँद का बेसब्री से इंतज़ार करते है यहां के लोग। ज्यों ही चाँद दिखता है तो इष्ट को चढाते है मखाने और दूध।
बीज के चाँद को देखकर यहाँ के लोग आने वाले दिनों के गर्भ में छुपी चीज़ों के कयास लगाते है और अाने वाले वक्त का भविष्य पता करते है। चाँद सीधा है या थोड़ा टेढा है, विभिन्न मुद्राओं के अनुसार बारिश कैसी होगी या आने वाले दिन कैसे होंगे इसके बारे में पता लगाते है।
चाँद देखने के लिए दूज के दिन बच्चे-बूढे सब घर की छतों पर टकटकी लगाये रहते है और ज्यों ही किसी को नज़र आता है चाँद तो लोग छतों पर से एक-दूजे को बताने लगते है। और फिर शुरू हो जाते है दूध और प्रसाद चढाने में, ताकि चाँद अस्त हो उससे पहले ही यह सम्पन्न हो जाये।

शुक्रवार, 12 जून 2015

रात बिरत रा आखर- ४ (सड़क, बाज़ार और गाड़ी)

आज सुबह की शुरूआत देर से हुई। क्योंकि कल रात भजन संध्या में गुजर गई। आज आँख थोड़ी ज्यादा ही देर से खुली तभी सूरज बा आँखे तरेर रहे थे और उनका गुस्सा देखकर तो उठना ही पड़ा।

तज़ुर्बा ये है कि शराब बहुत कड़वी होती है, ये हर किसी के बस की बात नहीं और मेरे तो हरगिज़ नहीं।

सड़क का किस्सा। आज तो पूरा दिन सड़क पर ही गुज़रा। गाँव-शहर-ऑफिस-शहर-ऑफिस-शहर-गाँव। बाइक चलाते समय हेलमेट जरूर पहने वरना आपके लिए बहुत नुकसानदेह साबित होगा। अगर ट्रैफिक वालों ने पकड़ लिया ना तो फिर साम-दाम-दंड-भेद सब धरे के धरे रह जायेंगे। आपको तारीख पर तारीख मिलेगी। रिचार्ज करवाना पड़ेगा, पानी की बॉटल लाकर देनी पड़ेगी वो भी ढक्कन खोल के :(। तो देखिए हेलमेट ना पहनना कितना खतरनाक है।

आजकल सड़कों पर स्पीड ब्रेकर बहुत ज्यादा हो गये है, दुसरे गियर से आगे बढने का मौका ही नहीं मिलता। संभल कर रहें ज़िंदगी का भी यहीं हाल है :)।

बाज़ार का किस्सा सुनिये। शाम का वक़्त, बाज़ार में भीड़, लोडिंग टैक्सी सामान लादे बीच बाज़ार गुजर रही है। ड्राईवर अपनी मस्ती में दाँये-बायें घुमाते हूए टैक्सी निकाल रहा है, उसके पीछे कुछ लोग अपनी मोटरसाइकिल टैक्सी से आगे निकालने के जद्दोजहद में लगे है। बहुत देर तक टैक्सी द्वारा जगह ना दिये जाने के कारण एक मोटरसाईकिल वाले बुज़ुर्ग बिफर गये। बाइक रोकी भागकर टैक्सी के पास पहूंचे, टैक्सी वाला समझ गया कि आज तो पिटा। रोकते ही भागा। आगे टैक्सी वाला बड़बड़ाते हुए और पीछे बाइक वाले बा गालियाँ देते हुए।
देखिए लोग कैसे हो गये कुछ को पीछे की दुनिया से कोई मतलब नहीं अपनी धुन में मदमस्त। और कुछ है कि आगे निकलने की जद्दोजहद में लड़ते भिड़ते।

गाड़ी का किस्सा। गाड़ी में कुछ लोग बातें कर रहे हैं। 
पेश है उनकी बातचीत का कुछ अंश।
मोदी ने म्यांमार में जाकर १०० आंतकियों को मार डाला। मुशरर्फ ने कहा कि पाकिस्तान परमाणु बम फेंकेगा सब लोग मर जायेंगे।
अब मोहब्बत नहीं रही, क़यामत का दिन आने वाला है, मौलवी साहब ने कहा है कि एक आवाज़ आयेगी उस दौरान कानों में रुई डालकर सब सज़दे में हो जाना। बला टल जायेगी।
अब लगता है इस्लाम का एक बार अंत हो जायेगा।
वो तो होना ही है देखो लोग किस तरह झूठी क़ुरान की कसम ले रहे है। सबसे पहले पाकिस्तान का खात्मा होगा।
लोगों में इंसानियत ही नहीं रही देखो ये अंग्रेज घूमने आते है, कैसे लोग हो। भाई-बहन का रिश्ता भी पाक नहीं रहा।

किस्सा खत्म।

हवा तेज़ हो गई है, धूल हवा से बातें कर रही है हवा पत्तों से गलबहियाँ कर रही है। मेढकों की आवाज़ हवा में घुल रही है। तारे फेड होने लगे है, शायद आँखो में नींद छा रही है।
तो अगर आप निहारिये तारे मैं चला सोने......